छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिलेगा कोयले संकट का असर?

इन बिजली घरों में रोजाना 19500 मेट्रिक टन कोयले की जरूरत पड़ती है लेकिन उन्हें 23290 मेट्रिक टन की आपूर्ति ही हो पा रही है।

छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिलेगा कोयले संकट का असर?

देशभर के कई प्रदेशों में कोयला संकट देखने को मिल सकता है कहा जा रहा है कि कोयले की कमी के कारण बिजली भी गुल हो सकती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में भी कोयले का संकट खड़ा हो रहा है जो बड़ी ही राजू की बात है क्योंकि देश दुनिया को छत्तीसगढ़ कोयले की आपूर्ति करता है ऐसे में छत्तीसगढ़ में ही कोयले की कमी होना देश के लिए चिंताजनक साबित हो सकता है।

जानकारी सामने आई है कि छत्तीसगढ़ के ताप बिजली घरों में केवल तीन चार दिनों तक का कोयला बचा हुआ है इन बिजली घरों में रोजाना 19500 मेट्रिक टन कोयले की जरूरत पड़ती है लेकिन उन्हें 23290 मेट्रिक टन की आपूर्ति ही हो पा रही है। इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को हालात की समीक्षा के बाद  SECL के CMD को पर्याप्त कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में राज्य विद्युत कंपनियों के अध्यक्ष एवं ऊर्जा विभाग के विशेष सचिव अंकित आनंद ने बताया, अभी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत संयंत्र कोरबा ईस्ट में 3 दिन और 8 घंटे का कोयला उपलब्ध है। इसी तरह हसदेव ताप विद्युत संयंत्र कोरबा वेस्ट में 3 दिन और 2 घंटे का कोयला है। केवल मड़वा ताप विद्युत संयंत्र में 7 दिनों की आवश्यकता भर का कोयला उपलब्ध है।