भोपाल

लड़के की चाहत में बहु को किया परेशान आरोपीगणों को जेल

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लड़के की  चाहत में बहु को किया परेशान आरोपीगणों को जेल

           

 

 

राजगढ। माननीय न्यायालय तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. अंजली पारे के द्वारा आत्महत्या करने हेतु उकसाने के एक मामले में फैसला सुनाया है। जिसमें ससुराल वालों के परेशान करने पर अभियोक्त्री द्वारा आत्महत्या करने पर, आरोपी पति एवं सास, ससुर को 07 साल सश्रम कारावास, 1 लाख 25 हजार रूपये का जुर्माना भी लगाया है।

            अभियोजन का प्रकरण संक्षेप में इस प्रकार है कि दिनांक 03 जुलाई 2016 को दिन के 11-12 बजे की है। मृतिका के पिता ने बताया कि मेरी पुत्री ने मुझेे फोन कर बताया कि, पापा आप छापीहेड़ा मेरे घर आ जाओ। मै छापीहेड़ा पहुंचा तो देखा कि मेरी लड़की ने सल्फास की गोली खा ली है। और साथ में मृतिका की दोनों लड़कियो को भी सलफास की गोली खिला दी है। मृतिका के उपचार के दौरान उसके मरणासंन कथन लिये जाने हेतु काफी प्रयास किये गये किन्तु मृतिका की हालत में सुधार न होने के कारण उसके कथन नहीं लिये जा सके। 

            मृतिका ने मृत्यु से पहले बताया कि अपने पिता को बताया कि उसके ससुराल वाले उसे दो लड़किया हो जाने और एक भी लड़का न होने से परेशान करते थे, लड़ाई झगड़ा करते थे, और लड़का न होने पर आये दिन ताना मारते थे, और उसकी दोनों पुत्रियों के बीमार पड़ने पर उनका ठीक तरह से ईलाज भी नहीं कराते थे। इस कारण अभियोक्त्री ने अपने ससुराल वालों से परेशान होकर सल्फास की गोली खा ली और उसकी दोनों पुत्रियों को भी खिला दी जिससे अभियोक्त्री व उसकी एक लड़की की मृत्यु हो गयी। मर्ग जांच के आधार पर थाना छापीहेड़ा में अपराध क्र. 230/16 धारा 306, 498, 34 की कायमी की गई। प्रकरण की विवेचना पूरी होने के बाद सुनवाई के लिए न्यायालय में पेश किया गया। जिसमें विचारण उपरांत दण्ड के आदेश पारित किये गये है। माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी पति  आनंद पटेल (परिवर्तित नाम)  को 07 साल सश्रम कारावास एवं 65000 रू. जुर्माना , सास-ससुर को 05-05 साल सश्रम कारावास एवं 30-30 हजार रूपये के अर्थदंड से दंडित किया है। मृतिका की एक पुत्री जो उपचार के दौरान स्वास्थ्य हो गयी थी, उसे 1 लाख 25 हजार रू. की प्रतिकर राशि देने का निर्णय लिया है। इस प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी जिला अभियोजन अधिकारी श्री आलोक कुमार श्रीवास्तव ने की है।

 

       मां-बाप को बतायी गयी घटना को माना मरणासन्न कथन:-

 

(प्रकरण के भारसाधक लोक अभियोजक जिला अभियोजन अधिकारी श्री आलोक श्रीवास्तव द्वारा बताया गया कि मृतिका के उपचार के दौरान उसके मरणासंन कथन लिये जाने हेतु काफी प्रयास किये गये किन्तु मृतिका की हालत में सुधार न होने के कारण उसके कथन नहीं लिये जा सके। इस कारण न्यायालय के समक्ष विचारण में पीडित महिला के द्वारा अस्पताल जाते समय अपने मां-बाप को बतलाई गई घटना को ही मरणासन्न कथन के रूप में मानते हुए अभियोजन साक्ष्य करायी गयी। और माननीय न्यायालय के समक्ष इस संबंध में न्यायदृष्टांत प्रस्तुत किये गये। जिनके आधार पर माननीय न्यायालय के द्वारा माना गया कि मृतिका द्वारा बतलाई गई घटना धारा 32 भारतीय साक्ष्य अधिनियम की परिधि में आती है और माननीय न्यायालय की विद्वुषी पीठासीन अधिकारी डॉ. अंजली पारे विशेष न्यायाधीश महिला अपराध ने दंड का आदेश पारित किया है।) 

लड़के की चाहत पर न्यायालय ने दी टिप्पणी:- 

(माननीय न्यायालय ने अपने निर्णय में अभियुक्तगणों द्वारा मृतिका की दो पुत्रियां होने और लड़का पैदा न कर पाने की बात पर से प्रताडित करने को गंभीरता से लेते हुए टिप्पणी की है, कि आज के दौर में भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा बालिकाओं को प्रोत्साहित करने एवं लड़का/लड़की को समान अवसर दिये जाने हेतु विभिन्न योजनाएं चलायी जा रही है। इसके बाद भी आरोपीगण द्वारा मृतिका को पुत्र उत्पन्न करने हेतु प्रताड़ित करना न केवल अमानवीय है, बल्कि भारतीय संविधान के समानता के अधिकार के भी विपरीत है। इस संबंध में न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी लेख किया है कि पुत्र को जन्म देना मृतिका के नियंत्रण से परे था, फिर भी उसे आरोपीगण द्वारा लगातार मानसिक रूप से प्रताडित किया गया है।)

 

       सल्फास खाने उपरांत जीवित बची बालिका को प्रतिकर:-

(माननीय न्यायालय की संवेदनशील एवं विद्वुषी पीठासीन अधिकारी डॉ. अंजली पारे विशेष न्यायाधीश महिला अपराध राजगढ़ ने अपने सत्र प्रकरण क्र. 363/16 में पारित निर्णय में मृतिका की पांच वर्षीय पुत्री जो ईलाज के दौरान ठीक हो गयी थी, और वह वर्तमान में अपने नाना के साथ रह रही है को आरोपीगण द्वारा न्यायालय में जमा करायी गयी सम्पूर्ण जुर्माना राशि 1 लाख 25 हजार रू. की प्रतिकर राशि देने का निर्णय पारित किया है। )

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